TARUN
जिंदगी के बारे में मैं क्या बताऊँ, दिल चाहे लिखना पर लिख न पाऊं, सोचता हूँ कुछ तो बता ही जाऊं, पर इन नासमझ हाथों को केसे समझाऊं, लिखना तो चाहते है ये भी बहुत कुछ, पर लिखने के शब्द कहाँ से लाऊं, अब आगे और क्या बताऊँ, दिल तो चाहे लिखना पर लिख न पाऊं.